ज़िन्दगी की पतंग
बहुत दूर तलक निकल गयी थी पतंग मेरी 🤗 समेटने मे उलझ जाती ज़िन्दगी मेरी 🤔 तोड़ दिया उस धागे को ही जिस पर उड़ रही थी पतंग मेरी 🤗🤗
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
बहुत दूर तलक निकल गयी थी पतंग मेरी 🤗 समेटने मे उलझ जाती ज़िन्दगी मेरी 🤔 तोड़ दिया उस धागे को ही जिस पर उड़ रही थी पतंग मेरी 🤗🤗
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets