जय गणेश
कृपा करें हे देव, करूँ मैं रचना उत्तम । छंद लिखूँ दिन-रात, भले हो परिस्थिति विषम।। गणपति दें यह ज्ञान,रचूँ मैं पिंगल प्यारा । ऐसा कर दें यत्न, मिले अब कहीं किनारा।। काव्य जगत की राह, बहुत ही दुर्गम मानो। जिसके गणपति नाथ,उसी को ज्ञानी जानो।। दया करें गणदेव, ज्ञान दें मुझे उबारें । पद्य-गद्य में लीन,अभी यह और सुधारें ।। नरेन्द्र सिंह, 25.03.2025
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