पुनर्मिलन
पुनर्मिलन को बिछड़ती हुई अतृप्त हस्त रेखाएं भाव-संवेग को वैचारिक समाधि में ही तत्पर करते रूढ़िवादी सामाजिक आडंबर उज्वल हृदय पटल पर छींटे गए प्रेम रंग अपलक निहारते और गोते खाते चकित विस्मृत नेत्र मन कलश में उपज कर जिह्वा पर आते आते विलीन होते सहस्रों प्रेम गीत चार पग साथ चलकर चार जन्मों के लिए जाग्रत देखे और संजोए गए दिवा स्वप्न
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