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लुफ्त हमे आता है अब फ़रेब खाने मे, आजमाए लोगो को रोज आजमाने मे। दो घड़ी के साथी को हमसफर समझ लेते है, किस कदर पुराने है हम इस नए जमाने में। तेरे पास आने मे आधी उमर गुजार दी, आधी उम्र गुजरेगी तुमसे दूर जाने मे। एहतियात रखने की भी कोई हद होती है, भेद हमने खोले है भेद को छुपाने मे। जिंदगी तमाशा है, और इस तमाशे में, खेल हम बिगाड़ेंगे खेल बनाने मे। करवा को उनका भी कुछ ख्याल आता है, जो सफर मे पिछड़े है रास्ता बनाने मे।
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