यादों का दौर !
यादें तो आपकी पल पल आती है.... पर अब कुछ खास सताती नहीं...! न जाने क्यूँ अब तो आदत सी हो गयी है... लगता है कि हम बातों को भूलना सीख गए हैं.....! आपका हर बार हमारी बातों से यूँ मूहँ मोड़ लेना, हमारी कमियों को गैरों से पूरी कर लेना....! उफ ! गजब की अदाएं है आपकी....! हम तो ठहरे अपने उसी पुराने अंदाज में, जहाँ मात्र किसी एक को ही चुन बैठे हैं.... पर हम ये भूल बैठें कि यह तो टोलियों का दौर है....! यह हम राह का नहीं विषम राह का दौर है....! कमियां तो अब भी खलती है, किन्तु तड़पाती नहीं...! यादें तो आज भी आती है.... किन्तु होले होले धुंधली पड़ जाती हैं! उफ ! ये आपकी यादों का दौर...! _रावल
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