दिल्लगी
न तुझे कभी समझ पाया, न कभी पाऊंगा , जिस अम्बर मे तु खिल्ती है , वही कही रेह जाऊंगा । बुलाले पास मुझे और फेक दे कही दूर , कहिभी चलाजाऊ लेकिन लोट के तेरे पास हि आऊंगा ।।
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
न तुझे कभी समझ पाया, न कभी पाऊंगा , जिस अम्बर मे तु खिल्ती है , वही कही रेह जाऊंगा । बुलाले पास मुझे और फेक दे कही दूर , कहिभी चलाजाऊ लेकिन लोट के तेरे पास हि आऊंगा ।।
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets