तक़दीर का खेल
ऐ तक़दीर जरा इतना बता क्यों खेल ये तूने खेला है आदमी दुःख मे अकेला और खुशियों मे मेला है 🥺🥺😒😒😔 गजब की होड़ लगी जीवन मे मेरे मुश्किलों की जिद है मुझे मिटाने की ठोकरों की कोशिश है मुझे गिराने की मेरे हौसले कहते हैँ कसम है तुझे जिताने की 🤗🤗🤗 दिल लगा है गम सारे छिपाने मे आँख है की पड़ी है उसे गम बताने की
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