कॉलेज का प्यार....
जवानी का नया नया बुखार हमें चडा था....2 स्कूल का प्यार खत्म, कॉलेज का अब चड़ा था....| जाते ही अपने बन गए कुछ अजनबी से लोग....2 रीत सारी कॉलेज की बताने लगे वहीं लोग...... माननी हर बात उनकी(सीनियर्स), जैसे घर के बुजुर्ग हो.... देनी है उन्हें ऐसी इज़्ज़त, कभी पायी कहीं ना हो..... छोटी सी बातों पर भी स्ट्राइक हम ने करी थी... रेगिंग के नाम पर भी कुछ मस्तियाँ भी करी थी..... आधी से ज्यादा क्लासे नंदु के वहां लगी थी.... खाने की बात छोड़ो समोसे चटनी ही जिंदगी थी... कॉलेज कम जिंदगी शोले फिल्म की तरह लग रहीं थीं... गब्बर भी बहुत थे, बसंती भी छाह रहीं थीं... कुछ इस तरह से कॉलेज का सिलसिला चला था... लेक्चर भी लगने लगे थे, प्रैक्टिकल भी होने लगा था... कॉलेज के लंबे सफर के कुछ हमसफर बनने लगे थे.. इसी दौरान एक सुन्दर सी घटना घटी थी..... ना चाहते हुए भी वो घड़ी आन पडी थी... प्रैक्टिकल की क्लास में वो सामने खड़ी थी... गलती से ही सही उनकी नज़रे हम पर पडी थी... फिर अपना क्या था........ जवानी का नया नया बुखार हमे चढ़l था.... स्कूल का प्यार खत्म, कॉलेज का अब चढ़ा था... Dr. Virang Pandya (वीरू)
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