उसकी सूरत
पहली नज़र उसकी ऐसी सूरत भोलेपन में मली हो वैसी लगा पूरा कूदरत भी उसके इस नई शुरुआत में उसके साथ हो मगर उसका मन मुझ पर ही अटका हो थी मैं भी उसके पास ही उसने देखा भी मगर पहले जैसे नही वो उदास था, टूट रहा था और मैं उसके दर्द में रो रही थी मैंने उसके सामने तो सब हिम्मत से समझाया पर अकेले में मेरा भी दिल घबराया डर था कि कहीं मुझसे कोई गलती न हो जाए पर खुद को हौसला दिया कि सब मेरे मुताबिक ही होगा हर पल उसके सामने रही हमने बात भी नहीं की पर बिन कहे बहुत कुछ कह दिया उसने हमेशा की तरह मुझे हौसला दिया मैंने भी दिलासा दिया पर अपने दिल की बात को अपने तक ही रखा मगर वो भी जानता था और मैं भी जानती थी कि हम दोनों ही एक दूसरे से सब कुछ कह कर भी सब नहीं बता रहें वो चुप था, इसलिए ताकि मैं सम्भली रहुँ मैं चुप थी ताकि वो सब्र रख सके हम दोनों ही एक दूसरे को रोक न सके उसने अपना रास्ता चुना मैंने अपना रास्ता चुना वो मुझे भूल गया और मेरा सब कुछ खो गया
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