ऐ काश के हम
ऐ काश के हम कभी और मिले होते, तुम हमसे जुड़े होते, हम तुमसे जुड़े होते, दोनों के मन में ये प्रेम के फूल खिले होते, ऐ काश के हम कभी और मिले होते... ना तेरी कोई गलती, ना मेरी कोई गलती है, ये तो वक़्त है शैतान जिसकी हमें देखके जलती है, साथ होते तो शुरू खुशियों के सिलसिले होते, ऐ काश के हम कभी और मिले होते... वक़्त होता अलग तो क्या ही माहौल होता, गुम तुम्हारी आँखों में, मैं शायद खुशहाल होता, नाराज़ होती तुम तो हाल मेरा बेहाल होता, लड़ते कभी कभी, कभी कभी शायद बवाल होता, खुश होते, नाराज़ होते, पर दर्द ना कभी सवाल होता, ना होते कभी शिकवे, ना ही कभी गिले होते, ऐ काश के हम कभी और मिले होते...
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