चुभते लहजे से
इतनी जल्दी क्यों रोते हो अपना साहस क्यों खोते हो यदि द्वंद्व छिड़ा है अंतर्मन में तो धैर्य का बोझा क्यों ढोते हो ..!! माना कठिन डगर है लेकिन उस पर भी तुम चलना सीखो पर्वत के कंकड़ चुभते-लहजे से हैं तो क्या हुआ उस पर्वत पर भी चढ़ना सीखो..!! जीवन का हिस्सा है हार जीत हर स्थिति में तुम बढ़ना सीखो साथ नहीं जाता है कुछ भी इसलिए अकेले रहना सीखो ...!! संघर्ष कर रहे हो तो ध्यान रखो हर क्षण कदम बढ़ाना सीखो तुमसे सब कुछ संभव है पर मुश्किल को भी कर जाना सीखो ..!! अपने कदम बढ़ाना सीखो ! मेहनत से लड़ जाना सीखो !!
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