अभ्युदय
सरलता में गूँज रही जो, वाणी वह वरदान, शब्द नहीं जो चौंका दें, बनें नहीं तूफान। झरने सा निर्मल बहे, अर्थ सहज, गंभीर, मन के सूने कोनों में भर दे नव उजास। छंद ना भारी, बोझिल ना कोई बात, बस जीवन जैसा निर्मल, सजीव, स्वच्छ। सत्य वही जो सरल बहे, गंगा-जैसी धारा, जहाँ न हो कोई आवरण, न कोई अंधियारा। अभ्युदय
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