कभी प्यार नहीं करूंगा
तुम मेरे नसीब में नहीं थी मैं जानता था फिर भी मैं तुझे अपना जहान मानता था । कैसे गुजर रहा मेरा पल पल ये कैसे बताऊं तुम्हें काश सुना सकता मैं अपनी दास्तां तुम्हे क्या गुजरता है मुझ पर तेरे बिन सच पूछो तो सुकून नहीं है तेरे बिन अब क्या करूं खो चुका हूं ना तुम्हे काश ऐसा होता की भूल जाता तुम्हें मैंने भी सोच लिया अब कभी याद नहीं करूंगा नजर मिल भी जाए कभी तो दीदार नहीं करूंगा तुम्हे भी तो कभी याद आएगी ना की कैसे तेरे साथ पल-पल गुजरता था कोई था बदनसीब जो तुम्हे जान से ज्यादा चाहता था।।
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