‘उसके जाने के बाद’
उसके जाने के बाद...... अब मैं लोगों से कम ही मिलता हूं, सोचता हूं कि फिर से कोई अपना ना मिल जाए, क्योंकि वह शख्स मुझे बहुत अपना-अपना कहता था उसके जाने के बाद..... मैं एक ऐसे शहर की तलाश में भटकता हूं, जहां दिल लगाने की भी कोई उम्र बनी हो, क्योंकि वह शख्स मुझे बहुत कच्ची उम्र में, इत्तेफाक से मिल गया था उसके जाने के बाद...... ना वह लफ्ज़ रहा,ना वह शख्स रहा और ना ही वह दिलदार रहा, वह शख्स चला गया और मेरे किरदार को इश्क की कहानी से पत्रहीन कर गया, उसके जाने के बाद...... अब मुझे अकेलापन बहुत राज आता है, मैं यह सोचकर दुनिया की भीड़ से बहुत दूर चला जाता हूं कि, कहीं लोगों के बीच रहकर उसकी यादों से भी मेरी रिहाई न हो जाए, उसके जाने के बाद...... दिन की बेचैनी और रात की खामोशी को जरिया बनाएं, मैं शहर की उसे गली में आज भी पड़े इत्तेफाक से गुजरता हूं, जहां हम हर रोज एक हुआ करते थे, और समेत लाता हूं उसकी सारी पुरानी यादों को जो, वो अक्सर मोहब्बत के दिनों में छोड़ देती थी, उसके जाने के बाद...... मेरे हसीन ख्वाबों को अधूरा ही छोड़ गया, मेरे इश्क की गलियों को वीरान कर गया, और मैं भटकता हूं हर रोज उसी की तलाश में क्योंकि वह शख्स मुझे बीच रास्ते में, अकेला ही छोड़ गया, उसके जाने के बाद !! नाम–राजू गुजराती
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