दोहे
ऊँच-नीच मानो नहीं, सबसे कर लो प्यार। जीवन के दिन चार हैं, सत्य करो स्वीकार।। मधुर वचन तुम बोल कर, सबसे रखना प्रीत। यही एक जो मंत्र है, देता जग में जीत।। यह जीवन उपहार है, मिली मनुज की देह। बैर-भाव को त्यागकर, सबसे कर लो स्नेह।। मानव जीवन श्रेष्ठ है, मानो सबको एक। बाँटो जग में प्रेम रस, रहना बनकर नेक।। ज्ञान प्रेम बाँटा करो, तजकर सब अभिमान। करता इतना दर्प क्यों, तय जब है अवसान।। सबको गले लगाइये, मानो सबको मीत। जात-पात सब दूर हो, कर लो सबसे प्रीत।। नरेन्द्र सिंह 24.06.2025
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