दिल की बात
सिर में दिमाग ओर दिमाग में अकल हो अकल से कार्य करने की आपमें समझ हो यूं तो इन बातों की सिर्फ उम्मीद ही की जा सकती है, पर फिर भी आपको यह रक्षाबंधन का पर्व मेरी ओर से मुबारक हो । जब बात आए समझदारी की तो सबसे पहले आपका ओर सिर्फ आपका ही नाम हो जब बात आए भोजन बनाने की , तो नमक और मसाले सदा स्वाद अनुसार हो , सिर्फ चाय पिला देने से ही पेट नहीं भरता है साहब, हर भोजन में बेचारी सब्जियों के साथ , हो रही अत्याचार पर इंसाफ की ललकार हो यूं तो गिफ्ट के तौर पर मेरा होना ही काफी है , इस लिए भाइयों की सदा कदर करनी चाहिए उनके कहने पर जब क्रिकेट में प्लेयर कम पड़े , तो उनके संग भी थोड़ा क्रिकेक खेल लेना चाहिए । वरना रक्षाबंधन का अर्थ कुछ यूं बदल सा जाता है , की अंत में आपको बड़ों के पास ना जाने क्यों भागना पड़ जाता है ।। बाकी आप सब खुश रहे बस यही चाहत है आज ईश्वर से , आशीर्वाद रूपी इस भाई की तरह ही चमत्कार होते रहे आपके जीवन में
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