महफिल
सजा के रखी थी महफिल तेरी याद में. दिल धड़के जैसे शमा परवाने की तरह. खुद की आश इस तरह थी मेरी. कलेजा जला के दे दी रोशनी मेरी धड़कन तेरी बता रही है याद मेरी
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