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तेरी मुस्कुराहट की छाँव में, मैं अपनी दुनिया सजा लूँ, तू वो अनमोल मोती है, जिसे मैं अपनी आँखों में छुपा लूँ। न कोई शर्त हो हमारी, न माँगने की कोई चाहत, बस तेरी खुशियों को ही, मैं अपनी इबादत बना लूँ। तू वो किनारा है, जहाँ मेरी कश्ती थमती है, तुझसे मिलकर ही तो, मेरी हर शिकायत मिटती है। तुझे पाने की ज़िद नहीं, बस तुझे महसूस करना है, तू दरिया है अगर, तो मुझे बस तुझमें ही बहना है। जब दुनिया शोर करेगी, मैं तेरी खामोशी बनूँगी, जब तू खुद को अकेला पाए, मैं तेरी परछाईं बनूँगी। बिना कहे सब समझ लेना ही तो रूह का मिलन है, जहाँ जिस्म पीछे रह जाए, और बस मन का समर्पण है।
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