चंद्र
तन्हा रहकर भी महताब की तरह चमकते हो, ये उम्र भर के तजुर्बों का नूर है, या कोई गहरा राज़ जानते हो ? इतना हँसो मत हम पर, नूर का विषय लेकर, दुनियादारी निपटा कर चेहरे पर नूर लाना, ये कोई तुलना का विषय नहीं। हाँ पता है हमें, ये उलझनें सारी अस्थायी हैं, लेकिन ऐ चंद्र, हम आप जैसी लंबी उम्र तो लेकर नहीं आए। एक उलझन नहीं है, बहुत उलझनों में उलझे हैं, वक्त और उम्मीद से झगड़ते हुए मुस्कुराने का अभिनय कर रहे हैं। किस-किस विषय को लेकर संवाद करूँ ऐ चंद्र? आप बात भी नहीं करेंगे हमसे ये पता है, फिर भी इंतज़ार कर रहे हैं।
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