वक्त का पहीया
वक्त का पहीया ======================== ईतने गेले शिकवे वादे क्यु, करते हो यार...., !, थोडीसी तो जिंदगी है, जो निभा ना सको. ये वक्त का पहिया है जनाब, बडा तेज घुमता है, याहा यादो मे वादे राहते है, खावीशे दम तोड देती है. बिगड जाते है वो रीस्ते नाते, जिनकी नीव हील जाती है, बरबादी का मंजर देखने वाले, आग पर घी डालकर जला देते है. वो तो दोस्त लोगो तुमपर निरभर है, ये कम वक्त मे तुम क्या करते हो, देखनेवालो के ऑंखो मे खौप भरते हो, या खाली हात लौटते हो, या खाली हात लागते हो. =====================
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
