एक शपथ लीजिए
आज होली अवसर पर,एक शपथ लीजिए; जगाएँ शांति के अलख,नेक कार्य कीजिए। आपसी बैर-भाव सब,आज ही जलाइए; द्वेष-जलन को दहनकर, प्यार को जगाइए। बाँटते रहें प्रेम रस, उस रस को पीजिए मानव को मानव समझ, उसे भाव दीजिए। अनिश्चित है यह जीवन , अहं नहीं पालिए; कौन कहाँ रहेगा फिर, मर्म यह तलाशिए। नरेंद्र सिंह 24.03.2024
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