आज में कल
आज में कल और जिस छड़ तुम्हें महसूस होगा, कि हो चुका हैं सब तहस नहस नहीं बचा अब कुछ भी बचाने को तब भी बचा रहेगा तुम्हारा "आज" इस संसार में तुम्हारा "कल" बचाने को।
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