ज़िंदगी का सफ़र —
ज़िंदगी का सफ़र — ज़िंदगी का सफ़र मानो तो मौज है, हर मोड़ पे बिखरी मीठी सी सौगात है। जो देखा दर्द को भी मुस्कान की नज़र से, उसके लिए तो हर दिन इक नई शुरुआत है। कभी धूप है, कभी छाँव का असर, कभी लगता है भारी, कभी लगता है सफ़र। पर सोच की नज़रिया ही तो फ़र्क लाता है, जो डर गया, वो थम गया—जो बढ़ा, वो पाता है। समस्याएँ तो मिलेंगी हर राह में रोज़, पर क्या हम रुक जाएँ हर ठोकर पे सोच? नहीं! चलना है, संभलना है, गिरकर भी उठना है, ज़िंदगी एक किताब है, हर पन्ना खुद लिखना है। जिसने माना हर पल को एक तोहफ़ा, वही बना सच्चा ज़िंदगी का लिक्खा। तो चलो मुस्कुराकर जिएं, चाहे हालात जैसे हों, क्योंकि मंज़िल उन्हीं को मिलती है जो सच्चे धैर्य से बहते हों। --
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