बाबाओं की मौज
ना पढ़ाई, ना काम, ना बिजनेस ,ना शुरू करो ढाबा, बस दाढ़ी बढ़ाकर, तिलक लगाकर, बन जाओ बाबा पाखंड का पाठ पढ़ाओ, शिक्षा से दूर ले जाओ, गोमूत्र , गोबर के रहस्य बताओ, पढ़े लिखे को भी मूर्ख बनाओ। महंगी महंगी गाड़ियों में आकर, एक ऊंचे से मंच से कथा सुनाओ, भक्तों को माया रखने के नुकसान बताकर, उनसे लाखों की फीस बनाओ। भगवा पहन कर रील बनाओ, लाखों में फॉलोअर्स पाओ, अपने को सर्वश्रेष्ठ बताकर, सोशल मीडिया से भी खूब कमाओ। भांडा फूटे तो हिंदुओं को खतरे में बताना, उनके बच्चों के हाथों में हथियार देकर, उनसे धर्म की रक्षा करवाना। अंधविश्वास, पाखंड को खूब बढ़ाना, विज्ञान और तर्क को गलत बताना। लिखने वालो पढ़ने वालों, तुम बस इमारतों के नीचे मंदिर की करो खोज, ये नए भारत के बाबा है , ये यूंही ही करेंगे मौज।
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
