पहचान खुद की
भर कर पंछी ने उड़ान निकल चली है मां बाप के सुरक्षित घोंसले से निकल दुनिया में अपना वजूद खोजने। बचपन से मिले हर सीख को चोटी से बांध हर कदम समझदारी से सिर्फ मंजिल की ओढ़ बढ़ाना है। कि मन में एक ही संकल्प है अब कामयाबी की कश्ति पर बैठकर ही वापस लौटेंगे।
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