सफल बनो
संक्रंदन छंद मापनी-- 222-122, 1222 पदांत-- 22अनिवार्य यति-- 11,7 मत देखो उधर तुम, बढ़े ही जा। ऊँचाई न देखो, चढ़े ही जा।। है आगाज अच्छा, इसे कर लो। चाहे राह दुर्गम, इसे धर लो।। चूमेगी सफलता, चरण तेरा । बाँधो गाँठ मन में,कथन मेरा।। है कुछ भी असम्भव, नहीं जग में। यदि जज्बा भरा हो,सही रग में।। जो चलता कुपथ पर, अधोगामी। मिलता नर्क जो हैं,बड़े कामी।। मन संलिप्त रखना,सुधर्मों में। कतई रत न रहना,कुकर्मों में।। नरेन्द्र सिंह, 20.03.2025
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