तू नारी है तू है चंडिका!!
तू नारी है, तू है चंडिका तेरी आँखों में है आग की लपटें तेरे कदमों में है शक्ति की धारा , तेरी आवाज़ में है मधुरता तेरी मुस्कान में है छिपी सूरज सी रोशनी तेरी इच्छा में है सृष्टि की संकल्पना, तू नारी है तू है चंडिका तेरी महानता में है सारे जगत को समाहित करने की शक्ति तेरे क्रोध से है झलकती रणचंडी सी ज्वाला तेरे दर्पण से प्रमुदित है पुरुष की आभा तू प्रेम है तू है करुणा का सागर इस धरा पर है सब पोषित तेरी दया का गागर तू नारी है तू है चंडिका। तू स्नेह से सिंचित बन जाए" अभिक्षा"।।
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