जीवन सौंदर्य
जीवन है अनमोल कितना, व्यर्थ ना इसको गवाना। कलह, ईर्ष्या, लिप्सा, तृष्णा इनसे हट कर कुछ करना। करो काम तुम जोश में, बाते करो तुम होश में। जीवन में आगे बढ़ते वही जो रखते है सोच सही । कितना सौरभ सुगंध देती है ये गुलाब, बनो इनकी तरह तुम भी लाजवाब। देखो जरा इन पंछियों को मेहनत कर अपना बनाती आशियाना। आओ हम भी बनाए अपना ठिकाना। कितनी हैं तितलियों में उमंग , देख इन्हें जाग उठी मन में तरंग। हम भी ले इनसे प्रेरणा, जग में अपना नाम है करना । सच्ची हो निष्ठा इतनी , पवित्र गंगा के पानी जितनी। जीवन में न करना अहंकार , जीवन बन जाएगा तब साकार।
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