"मैं अब भी हूं..."
"मैं अब भी हूं..." मैं भूल रहा हूं नाम तेरा, पर दिल में एहसास वही है। चेहरे अब धुंधले लगते हैं, पर आँखों में प्यार वही है। कभी खुद को भी मैं खो देता हूं, आईने से डर सा लगता है। कल की बातें याद नहीं, पर तेरा ‘साथ’ अब भी अपना लगता है। तू पूछती है — "पहचाना क्या?" मैं मुस्कुरा कर कह देता हूं, शब्द नहीं मिलते अक्सर अब, पर दिल से तुझे जी लेता हूं। घर के कमरे अजनबी जैसे, रास्ते सब बदल गए हैं। पर जब तू पास होती है, सब डर जैसे गल गए हैं। कह नहीं सकता, पर जानता हूं, तू मेरी दुनिया की आख़िरी रोशनी है। शायद एक दिन सब भूल जाऊं, पर तू... कभी नहीं भूलेगी मुझसे।
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