लम्हे
उन बहती हुईं हवाओ को पूछो, हमने देखे बहुत नजारे। याद आई हमे बहुत तुम्हारी, हमने लम्हे खूब सवारें। अब पूछो उन बीते समय को, कैसे काटे पल पल हमने बिना तुम्हारे । हर पल याद दिलाई उसने तुम्हारी, हमने लम्हे खूब सवारें। जिंदगी के उसूल मे, न जाने हम कहां हारे। पतले डारी की रिश्तों पर, हमने लम्हे खूब सवारें।
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