आधार छंद-- हरिप्रिया*
परिचय -सम मात्रिक दंडक* प्रति पंक्ति--46 मात्रा यति-- 12, 12,12,10 शीर्षक-- आरती उतारूँ। 1 पूजा करूँ दिन रात, यही मुझे अब सुहात, ले कपूर थाल ज्योति, आरती उतारूँ। नहीं ज्ञात तंत्र-मंत्र,साफ हृदय स्वच्छ अंत्र, पता नहीं अन्य यंत्र,कहाँ तक सुधारूँ।। स्वार्थ नहीं लेश मात्र,मानो मुझको सुपात्र, रहे पास स्वस्थ गात्र, तेरे गुण गाऊँ। सदा मिले शुभ सुसाथ, यही आस प्रभु अनाथ, झुका रहा द्वार माथ, वर प्रभु पा जाऊँ।। 2 रहना है यदि निरोग, करना तुम रोज योग, त्यागो आलस्य भोग, स्वयं को सँभारो। मांसरहित भोज-खान, दया करो जीव जान, नशा का न रंच पान, ये दुर्गुण टारो।। रहो सदा भक्ति लीन, कभी रहे मन न खिन्न, रहो नहीं छिन्न-भिन्न, प्रभु को न नकारो। जिएँ जिंदगी सकार, आए न गलत विचार, खुशी रहो हर प्रकार, हार न स्वीकारो।। नरेंद्र सिंह,अतरी, गया 14.06.2025
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