कैम्पस की रात, पहली मुलाकात
रंगों में डूबी यूनिवर्सिटी की रात, संगीत की धुन में खोया सबके साथ। खुले आसमान तले, वहां रंगमंच सजा था, उस रात पहली बार, मेरी नज़रें उस पर पड़ा था। सितारों की चमक में, वो खोई सी लग रही थी, मुस्कान पर उसकी, चाँदनी छाई सी थी। रेशमी साँवले बाल, गालों पर लगी सींदूर की मांद कमर लचकती जैसे नदी बहती आहट मे सफेद कपड़े से ढकी बदन उसकी , जैसे फुल को सूरज चाहिए थे उसकी यादों में खोया, अब तो जीना ही मुश्किल, कैसे ढूंढो में उससे मिलने का मंजिल। उसकी आँखों में खोया, मैं बस देखता ही रहा, उसकी आवाज़ में, अपना नाम जो पुकारा। फिर से देखा उसे दूर खड़ी सीढ़ियों पर, जैसे कोई स्वर्ग से उतरा हुआ तारा, अंजान थी वो, पर चेहरा ऐसा किनारा। अब तो खुले आसमान तले, वो मेरी यादों में बसती है, उसकी मोहब्बत के लिए, मेरी रूह तरसती है। अब रातों को सताती हैं, उसकी यादें अजीब सी, कैसे भूलूं उस चेहरे को, जो खो गया झलकती सी।
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