छोटी-सी जिंदगी
छोटी-सी जिंदगी यह है, हँस बोलकर सब काट लो। इंसान हो इंसान रहो, आपस में प्यार बाँट लो।। मुँह फुलाना मुँह बिचकाना, जलना-जलाना छोड़ दो। अहं-घट जो लबालब भरा, ढोओ मत उसे फोड़ दो। दिल को भारी न रखा करो, बैर-भाव को निचोड़ दो। गुल्लक में संग्रह जो घृणा, उसको शीघ्र ही तोड़ दो।। प्रभु की अनमोल रचना हो,इसपर जरा-सा ध्यान दो। जो मिलता है वही देता, उनके दिए को मान दो।। नरेन्द्र सिंह, 20.5.2025
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