मैं अब बदल गया हूँ…
मैं अब बदल गया हूँ, पहले जैसा नहीं रहा। अब वो रातों को जागकर लिखना भी नहीं होता, ना ही किसी की याद में आंखें भीगी रहती हैं। अब हँसता हूँ, मगर वजह नहीं पूछना — क्योंकि अक्सर ये हँसी दर्द के पीछे छुपकर आती है। अब किसी से उम्मीद नहीं रखता, ना ही किसी से शिकायत करता हूँ। सीख लिया है कि सबके पास वक़्त नहीं होता, और हर कोई वफ़ादार नहीं होता। अब मैं जवाब नहीं देता, क्योंकि अब सवाल भी नहीं करता। जो चला गया, उसे रोकने की कोशिश अब नहीं होती। अब तस्वीरें नहीं देखता, ना ही पुराने मैसेज पढ़ता हूँ। अब बस आगे बढ़ता हूँ — चुपचाप… जैसे कुछ हुआ ही नहीं। मैं अब बदल गया हूँ, कभी ज़रूरत बन कर जीता था, अब बस ज़रूरी सा बनकर रह गया हूँ। कभी किसी की दुनिया हुआ करता था, अब भीड़ में एक चेहरा हूँ — जो किसी को याद नहीं रहता।
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