झीझक
झीझक ================= झीझक ते क्यु हो इतना, एक सिधी बात करने मे, यहा सब अपनेही तो है, फीर ये पराये जैसी हरकत क्यु. वफा परायसे करते हो, फिर नफरत दील मे, आपनोसे से क्यु, झीझक कीस बात की है, क्यु राहते हो सुन सुन. चुपचाप से निहारते हो हर चेहरा, जाने क्या ढुंढते हो, सब ईन्सांनही है, जाने तुम ऊन मे आलग क्या ढुंढते हो. दीमाग है सब मे कम जादा,. जाने तुम आपने दीमाग पे.., ईछना ईतरात क्यु हो. जाने झीझक कीस बात की है, जाने झीझक कीस बात की है. =======================
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