बेजुबान
छोड़ के अपराधियों को , न्यायालय पशुओं पे आ गई। करके बेजुबानों पे वार, फिर वो इंसानियत को खा गई। इधर– उधर की बात करते– करते,जब बात मुद्दे पे आ गई। अब कुछ न कुछ तो करना ही था ,फिर क्या? सब कुछ छोड़ के सरकार,इस बार कुत्तों पे आ गई।
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