वादा-ए-उम्र, दुआ-ए-मौत
मैंने प्रेम के महीने में प्रेम को खोया है, क्योंकि जिसने आख़िरी साँस तक साथ चलने की क़सम खाई थी, उसी ने बीच सफ़र में कायरों की तरह मुँह मोड़ा है। जो ज़ुबान पर कहता था— तेरी लंबी उम्र के लिए करवा चौथ रखूँगी, उसी ने पीठ पीछे, यक़ीन मानो, मेरी मौत की दुआ भी सबसे पहले अपने रब से माँगी है।
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