०७/११/२०२४
जब आदमी बता नहीं पाता बातों से तो लिख लेता है, लिख देता है हर वो लफ्ज़,जो कहने में वो तत्पर नहीं, वो कहना चाहता है किंतु कहता नहीं। कभी भावनाओं को बताने को शब्द नहीं होते उसके पास, होती है तो बस एक कलम और दवात तो वो लिख देता है। वो लोगों से घिरा रहता है पर किसी से कह सके ऐसा कोई नहीं उसके पास, इसलिए वो लिख लेता है सबकुछ एक पन्ने पर उतार देता है। पर किसी को बताता नहीं कुछ कहता नहीं बस खयालों को समेट लेता है, शब्दों को कागज पर बिखेर देता है। उसे पता है हृदय की व्यथा को केवल वो जानता है, जानता है अंदर रखने पर बातों को दर्द होता है। आंसू बहा नहीं सकता इसलिए, आंसू को स्याही बनाकर शब्दों में पिरो देता है। जब वो कह नहीं पाता तो लिख लेता है।।
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