यादें
कुछ अनोखे पन्नों की सिसकी , जब मन में सवार यूं आती है , वर्तमान में बैठे इस मन को , कहीं अतीत में वार ले जाती है उन बेबात हस रहे लोगों की , जो साथ पुरानी छूट गई , उस " साथ " के साथ जीवन की कई शरारतें डुब गई जो एक कमरे में बैठे , यादें बुनते, उस कमरे से भी नाता छूट गया , पीठ पर टंगे बैग , ओर उन गलियों से नाता टूट गया ।। पर साथ कई कहानियां लिए , एक नए सफर के निर्माण में , यह अनोखे यादें भी साथ रहेंगे , कहीं गूंजते मन के जहां में ।।
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