निगाहें
निगाहों के तकाजे चैन से मरने नही देते, यहाँ मंजर ही ऐसे है की दिल भरने नही देंते। ये लोग औरों के दुख जीने निकल आये सड़को पर, अगर अपना ही गम होता तो यूँ धरने नही देते। यही कतरे जो दम अपना दिखाने पर उतर आते, समुंदर ऐसी मन मानी तुझे करने नही देते। कलम मै तो उठा के जाने कब का रख चुका होता, मगर तुम हो के किस्सा मुख्तसर करने नही देते। हमी उन से उम्मीदे आसमां छूने की करते है, हमी बच्चो को अपने फैसले करने नही देते।
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
