दूरियां
मेरे इतना नज़दीक आकर मुझसे ज़रा भी दूर मत रहो अब इन दूरियों से कह दो हमारे दरमियां उनकी कोई जगह नहीं है। जब दोनों के दिलों में है नज़दीकियों की चाहत तो इसे क़सूर मत कहो अब हमारे दूर रहने की कोई वजह नहीं है। फूल भी हो दरमियां तो फ़ासला ही कहलाएगा हम इक-दूजे में खो जाएं ऐसे, जैसे इस रात की कोई सुबह नहीं है। ©® महेश कुमार 'मैडी
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