वो मौसम बन कर आए थे
वो मौसम बन कर आए थे, वो मौसम बन कर आए थे कभी बारिश की तरह तो कभी सर्दी की सुबह, कभी उन बूंदों से बरसता पानी था हमारी मोहब्बत का गवाह,,, उस गर्मी में ठंडी हवाओं की तरह, जो दे गया सुकून एक राहत की तरह।। वो मौसम बन कर आए थे, वो मौसम बन कर आया थे, ए गुजरे हुए इस वक्त की तरह ना कल का पता, न बीते हुए कल का ख्याल बस यूंही तेरा साथ हमेशा रहे, इस दिल में धड़कन की तरह।। कर
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
