आज का नेता
--- आज का नेता (व्यंग्य कविता) वो देखो रथ पर सवार आज का नेता, चुनाव केदिनों में है ये सबसे बड़ा सेवा-भेता। जनताके दुख-दर्द का करता है रोना, वोट मिलतेही फिर हो जाता है सोना। बड़ी-बड़ी योजनाओं के करता है वादे, विकास कीबुनियाद में भरता है फांदे। खाताहै घूस, करता है घोटाला, फिर भीटीवी पर देता है मीठा-मीठा भाषण गोला। उसकी जय-जयकार में लगे रहते भक्त, उसकीहर गलती पर करते हैं अंधे होकर टैक्ट। जनताकी बेवकूफी पर हँसता है वो खूब, बाँटताहै जाति, बाँटता है धर्म, बाँटता है सूब। उसकी तस्वीर हर होर्डिंग पर मुस्कुराती है, मगर उसकादिल सिर्फ पैसों के लिए तरसाता है। सड़केंटूटी, स्कूल बिना छत के, नेताजी की कोठी है हवाई अड्डे से भी ज्यादा अच्छे। बाबू बनकर बैठा है संसद के भीतर, काम सिर्फ अपनेस्वार्थ के लिए करता है वो धीर। पांच साल मेंसिर्फ एक बार आता है गाँव में, वोभी झूठे वादों के ढेर लगाकर चला जाता है काम में। जनता की आवाज़ को दबाता है लाठी से, लोकतंत्र कामजाक उड़ाता है अपनी चालाकी से। कहतेहैं ये है देश का भाग्य-विधाता, अरेभगवान! बचाओ इस "आज के नेता" से। --- हमें कैसा नेता चाहिए? आज के इस दौर में, जहाँ नेता का चित्रण एक स्वार्थी, भ्रष्ट और जनता से कटे हुए व्यक्ति के रूप में होता है, हमें एक आदर्श और सच्चे नेता की सख्त जरूरत है। हमें ऐसा नेता चाहिए जो च
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