मुझे क़ुबूल
पहन के जूते साफ़ सफ़ेद, चल तू कच्ची राहों पर तेरे पैर की उड़ती धूल, " मुझे क़ुबूल " मन रख अपना गंगा जैसा तन बेशक व्याभिचारी रख तेरी हर नादानी तेरी हर एक भूल, " मुझे क़ुबूल" ले चल अपने साथ मुझे उस रस्ते पर, जो रास्ता सीधा जाए उस पथ पर कांटे हो या फूल, " मुझे क़ुबूल" चाहें भ्रम में रखके छाया, फल और फूल के सींच ले अपने भीतर मुझको फिर तू बरगद बने या बबूल, "मुझे क़ुबूल " एक प्यार भरी आवाज़ लगा, पास बिठा, गले लगा अपनी आगोश में एक रात सुला चाहें मैं न तुझे क़ुबूल ये भी "मुझे क़ुबूल " तेरे साथ मेरा नाम जुड़े, अमर हो अपनी प्रेमकथा चाहें जीवन हो फ़िज़ूल "मुझे क़ुबूल" तेरे इश्क में ऐसा हो जाऊं, मैं कोई मसीहा बन जाऊं बदले तिलक मिले या शूल, "मुझे क़ुबूल"
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