हालात
युही नही ये खलीपन मुझमे समाया होगा, मैंने अपने अंदर क्या क्या दफनाया होगा। अब मुझसे कहे भी नही जाते हालात मेरे, शायद खामोशी पर मैंने एक उम्र को बिताया होगा। हुनर शब्दो का बहता हुआ कलम से उतर तो जाता है, कहने मे फिर वही बात क्यो कोई घबराया होगा। क्या मुझे कोई ढूँढने नही आया कोई अपना मेरा? या खुद को मैंने बहुत एहतियात मे छुपाया होगा। अब बयां कर दिया जाए क्या इस घुटन को? कितनी बार जहन ने इस एक शिफारिश् को दोहराया होगा।
Ad
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
Shop Now →
