जाड़ा अइलो
अइलो अब जाड़ा रे बाबू,रहिहs सभे सवधान हो, हलका में नै लिहs एकरा ,चल जइतो तोर जान हो। गरम कपड़ा से ढकले रहs,सभे कोय अपन देह हो, जड़वा से मज़ाक़ नैय करs, नै तनको करs ठेह हो। सुसुम करके ही पानी पिहs,गरम गरम खान पान हो, जड़वा से बचले रहs सभे ,सेहत पर द अब ध्यान हो। बहरे घर से जखनी निकलs,देहिया रखिहs झांप हो, मफलर,टोप,पहनले रहिहs,सवेटर पहनs चांप हो। बचबनो के बचा के रखिहs ,बुढ़ा के जाड़ा काल हो, जबनको नैय चेतल रहबs,तो होतो बुरा हाल हो। नरेंद्र सिंह,अतरी 28.12.2024
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