पाँच अमृत ध्वनि
1.चंदन चंदन पादप है बड़ा, लिपटे रहते व्याल। होते कई प्रकार के, पीला उजला लाल।। पीला उजला, करे जग भला, सौरभ दाता। देवों के प्रिय, श्रेष्ठतम अमिय, दिए विधाता।। यह है पावन, गंध लुभावन, करना वंदन। अति उपयोगी, करे निरोगी, रक्ता चंदन।। 2.घायल घायल है आतंक से, भारत मेरा देश। छुप-छुप करता वार अब, करे गद्दार क्लेश ।। करे गद्दार, क्लेश हर बार, गिरकर नीचे। भारत अंदर,बहुत छछूँदर, रहता बीचे।। जिसका खाता, उसे सताता, रहे न कायल। इन दुष्टों से, नारुष्टों से, भारत घायल।। 3.जगत निराला जगत निराला जानिए, यह है माया जाल। करो राम से प्रीत रे, रखता जो है ख्याल।। रखता जो है, करता जो है, जग का तारण। छल को तज लो, उसको भज लो, खोओ मत क्षण।। सबका नायक, वही विधायक, है रखवाला। काया जाया, समझ पराया, जगत निराला।। 4.मुदिता मुदिता उत्तम भावना, जिससे मन हो शांत। बोलो बोली प्रिय सदा, लगे हृदय को कांत।। लगे हृदय को, करे सभय जो, मीठी वाणी। मन को छूले, उर गुल फूले, खुश हो प्राणी।। हर्षित रखती, पीड़ा हरती, रखकर शुचिता। दिल को पावन, मन अति भावन, रखती मुदिता।। 5..साजन साजन बिन कैसे रहें, मन में भरा विषाद। रात काटने है लगी, आते हरदम याद।। आते हरदम, भारी है गम, क्या बतलाऊँ। कैसे सहकर, दुख में रहकर, मन बहलाऊँ।। जल्दी आओ, मन हर्षाओ, हे तू राजन। सावन आया, सबका आया, तू आ साजन।। नरेन्द सिंह 31.05.2025
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