उसकी चाहत में
उसकी चाहत में भुला बैठे हैं दुनिया को हम उसने रुसवाई के सिवा मुझे दिया क्या है। हमने शिद्दत से इतना चाहा है उसे उसने बेवफाई के सिवा किया क्या है। कहता है तुझे अपना बनाएंगे ज़माने को भुलाकर सिर्फ अपनी बातो से फिरा और किया क्या है। कैसे कर लूं अब मैं भरोसा उसका उसने सिर्फ भरोसे को तोड़ने के सिवा किया क्या है।
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