गणपतिः बप्पा का आगमन
गणपति बप्पा का आगमन ✍️ कवि – विजय शर्मा एरी सुनो गगन में गूंज रही, मंगलमय वाणी है, घर-घर में आज बप्पा जी के स्वागत की कहानी है। ढोल-नगाड़े बज उठे, गूँजे चौक-चौराहे, “गणपति बप्पा मोरया” के जयकारे ही जयकारे। सज धज कर हर गली-नगर, दीपक की झिलमिल रोशनी, आए विघ्नहर्ता गणनायक, लाए संग अपार खुशी। लाल फूलों से सजी हुई, आरती की थाली है, भक्ति में भीगी मन की धरती, आँखों में लाली है। मिट्टी की खुशबू में घुली, भक्तों की प्रीत निराली है, संग गजानन बैठे हैं, सुख-समृद्धि की डाली है। नन्हें बच्चे झूम रहे, माथे पे चंदन का रंग, माँ के संग गा उठे सब, भक्ति रस से भर गए अंग। हर दिल में उमंगें जागीं, हर मंदिर सजा निराला, जहाँ-जहाँ बप्पा पधारे, वहाँ खिला जीवन उजाला। भक्तों की अरदास यही है, जीवन में न आये विषाद, सदा रहे चरणों में हमारी श्रद्धा, प्रेम और विश्वास। हे सिद्धिविनायक कर दो पूरी, सबकी सरल मनोकामना, तुम्हारे बिना अधूरी है, जीवन की हर साधना। गगन गूँजे, धरती नाचे, हर घर में दीप जलें, स्वागत है गणनायक का, सब मिलकर गीत गुनें। 🙏 “गणपति बप्पा मोरया, मंगलमूर्ति मोरया!”
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