होली
शीर्षक :भरत जी ढारेला लोर भरत जी ढारेला लोर- 2 अभिओ नै अइलन भईया ।-2 भरत जी ढारेला लोर -भरत हो -2 चौदह बछर पर आबे के बेरिया-2 अभी तक नै हे कउनो खबरिया-2 रहिया जोहत होवइ भोर हो, अभियो नै अइलन भईया।। कउन विपतिया घेरलक रहिया-2 या ऊ बनलन वन के बसिया-2 या भईया देलन हम्मरा छोड़ हो -2 अभियो नै अइलन भईया।। दिनराते हम्म पूजs ही खड़उयाँ-2 हरदम जपs ही राम के नउयाँ-2 कहिओ नय सुतली हम्म पलंगवा, कुस बिछावन देह रखली नंगवा। तहिओ देलका दिल हम्मर तोड़ हो अभियो नै अइलन भईया। छछन-छछन भरत करय विलपवा-2 ई देख परजा के फटय कलेजवा-2 मईया के चलते ई दुरगतिया, किसिम किसिम के करय लोग बतिया। मँझली ही देलकय कुल बोर हो अभियो नै अइलन भईया।। भरत जी ढारेला लोर, अभियो नै अइललन भईया।। नरेंद्र सिंह,गया 02.03.2025
Poetry Books 50% Off
Bestselling collections from top poets
